गिरियक नालंदा के कार्तिक मेलें में सम्पन्न हुआ पासी सम्मेलन

हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी कार्तिक पूर्णिमा के दिन गिरियक, राजगीर ,नालन्दा में पासी मेला के साथ ही सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें उद्घाटनकर्ता पूर्व बिहार विधानसभा अध्यक्ष उदय नरायण चौधरी के साथ सम्मेलन में भाग लिया । श्री चौधरी ने सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि अपने हक अधिकारों के लिए समाज की एक जुटता जरूरी हैं,रुढिवाद अंधविस्वास के खिलाफ हमें जागरूकता लाने होगी।

कार्यक्रम के आयोजक-महेंद्र चौधरी , सचिव राज कुमार चौधरी ,संचालक – रामाशीष चौधरी , संरक्षक राजेंद्र कु चौधरी (मुस्तफापुर) अनुज मुखिया ,पड़कन चौधरी ,प्रेमा चौधरी ने अपने विचार ब्यक्त किये। इस अवसर पर पासी समाज के हजारों लोग उपस्थित रहें।

वीरा पासी की बहादुरी का अंग्रेज भी लोहा मानते थे – सुशील पासी

अमर शहीद वीरा पासी की स्मृति मे वीरवर बीरा पासी ट्रस्ट द्वारा लालगंज नगर पंचायत में मनाया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रुप में *राष्ट्रीय भागीदारी मिशन के मुख्य संयोजक माननीय सुशील पासी जी* उपस्थित रहे । श्री पासी ने कहा कि वीरा पासी देश के लिए शहीद हुए थे वे किसी एक जाति या किसी एक धर्म के नही लड़े थे ।भारत के समस्त नागरिकों को जब तक समस्त क्षेत्रों में आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलेगा या भागीदारी नहीं मिलेगी तब तक हम वीरा पासी के सपनों का भारत नहीं बना सकते हैं। देश की आजादी में हम जाति और धर्म के लोगों ने अपना खून बहाया है।

1857 की क्रांति में शहीद हुए शहीदों का चित्रण करते हुए कहा कि आज के युवाओं को देश के लिए शहीद हुए वीरों से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सियासत करने वालों ने हमें आपस में लड़ आया जिससे देश कमजोर हुआ यह देश भाईचारे और बंधुत्व से चलेगा। हमारी वसुधैव कुटुंबकम हमारे विश्व गुरु बनने की ओर एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि हमारा समाज सामाजिक रूप से संगठित होता है, हम सब मिलकर सामाजिक सम्मेलन तो करते हैं परंतु अब हमें जरूरत है अब हम राजनीतिक रूप से संगठित हो और प्रदेश में अपनी भूमिका तय करें। इस मौके पर मुख्य अतिथि ने विभिन्न क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले छात्र छात्राओं को अंग वस्त्र एवं प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया तथा वीरवार वीरा पासी ट्रस्ट के सदस्यों को उक्त कार्यक्रम के लिए धन्यवाद दिया।

इस मौके पर राष्ट्रीय भागीदारी मिशन के जिला प्रभारी सुरेन्द्र मौर्य जी, जिला अध्यक्ष यशपाल एडवोकेट जी , जिला महासचिव शिवप्रसाद जी विजय कुमार जी इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर योगेश जी , राजेश वर्मा जी समेत हजारों की संख्या में लोग उपस्थित रहे।

पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा नहीं मिला तो होगा बड़ा आंदोलन – सुशील पासी

रायबरेली / बछरावां विधानसभा की महाराजगंज तहसील में बिजली विभाग की लापरवाही से सूर्यभान मौर्य नाम के एक नवयुवक मृत्यु हो गई.बिजली विभाग के कर्मचारी मामले की सांठगांठ करके मामले को खत्म करना चाहते थे और अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे थे .

इस दुखद घटना की सूचना पाकर के राष्ट्रीय भागीदारी मिशन के मुख्य संयोजक माननीय सुशील पासी जी मौके पर पहुंचे और महाराजगंज कोतवाली परिसर में ही धरने पर बैठ गए.और संबंधित विभाग पर एफ आई आर की मांग करने लगे.

पुलिस प्रशासन धरने को समाप्त करने की पुरजोर कोशिश करता रहा लेकिन सुशील जी अपनी बात पर अड़े रहे . अंततः जब उनको एफ आई आर की कॉपी मिली तब उन्होंने अपना धरना समाप्त किया.

सुशील पासी जी ने कहा यदि पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा नहीं मिला तो राष्ट्रीय भागीदारी मिशन एक बड़ा आंदोलन करेगा.

बिजली कनेक्शन और रसोई गैस है तो नहीं मिलेगा मिट्टी का तेल

प्रयागराज:अब राशन कार्ड धारकों को केरोसिन मिट्टी का तेल नहीं मिलेगा जिनके पास बिजली कनेक्शन और रसोई गैस कनेक्शन है सरकार ने इन लोगों को मिट्टी का तेल वितरण न करने का आदेश जारी किया है जिला पूर्ति निरीक्षक ने बताया कि सिर्फ उन्हीं कार्ड धारकों को मिट्टी का तेल वितरण किया जाए जिनके पास ना बिजली कनेक्शन है और ना रसोई गैस कनेक्शन तेल की उपयोगिता को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है लोगों को अब मिट्टी के तेल की आवश्यकता उतनी नहीं पड़ती जितना पहले पढ़ती थी क्योंकि जब से बिजली कनेक्शन और रसोई गैस कनेक्शन लोगों को मिल गया है इससे लोगों को बहुत राहत मिली है और मिट्टी के तेल की उपयोगिता लगभग समाप्त हो गई है

रिपोर्ट : दारा सिंह सरोज

पासी समाज सीतापुर की शान छोटकऊ लाल नही रहें ,104 वर्ष की आवस्था में निधन

मूलचंद भार्गव ,सीतापुर / आज का दिन पासी समाज सीतापुर के लिए बहुत ही निर्दई एवम् अशुभ रहा, जिसने हमारे समाज के एक सामाजिक ब्योवृद्घ ( हमारे साथ गांधी टोपी पहने बैठे)जिन्होंने अपना संपूर्ण शतकीय जीवन समाज को एक नई दिशा देने में लगा दिया, सीतापुर में कोई भी सामाजिक बैठक या सभा उनके बिना अधूरी मानी जाती थी, उनका नाम समाज के हर व्यक्ति को मास्टर छोटकऊ लाल कुड़कापुर वाले के नाम से जाना जाता था।

आज हम जो भी समाज में कर पाए यदि ये कहें कि इसमें उनका आशीर्वाद ही था कि वह समय-समय पर हमें ढांढस व साहस दोनों प्रदान करते थे, वह हमारे उत्तर प्रदेशीय पासी जागृति मण्डल सीतापुर के अध्यक्ष श्री एस. एस. लाल के पिता जी ही नही थे अपितु हमारे संरक्षक भी थे।

आज उनका लगभग एक बजे आकस्मिक निधन हो गया, यह श्री छोटकाऊ लाल जी का निधन नहीं, पासी समाज का एक स्तम्भ कहें या बड़ा सितारा हम सभी को ऐसे राह पर छोड़ गया है जहां उन जैसा पथप्रदर्शक हम लोगों को मिलना नामुमकिन है। माननीय श्री छोटकाउ लाल लगभग १०४ वर्ष के थे उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव कुड़का में सायं काल कर दिया गया। हम उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना और मृतात्मा के लिए शान्ति की कामना करते हैं।

2 अक्टूबर ! यानी गाँधी ,शास्त्री और महाशय जयंती

●अजय प्रकाश सरोज

2 अक्टूबर यह दिन भारत में चर्चा का विषय रहता है । यहां तक विदेशों में भी गांधी को मानने वाले लोगों के लिए यह उत्साह भरा दिवस होता है दुनिया भर में गांधीवादी चिंतकों ने गांधी की लोकप्रियता को दिनों दिन बढ़ाया है । गांधी सिर्फ लाठी, चश्मा और धोती वाला रकारी लोगो मात्र नहीं है, यह एक विचार है जो सामने खड़े विशालकाय शत्रुओं को लड़ने का साहस देता है । बिना किसी बंदूक और हथियार के अहिंसक आंदोलन व सत्याग्रह के जरिए । यह हथियार दुनिया भर में गांधी के नाम से ही प्रचलित हो गया है, वैसे तो बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के मानने वाले अनुयायियों ने सिद्ध किया है कि बाबासाहेब जो तथागत बुद्ध के अनुयाई थे। उन्होंने पहली बार महाड़ तलाब से दलितों को पानी पीने के लिए सत्याग्रह किया था। उन्होंने कभी हिंसात्मक आंदोलन की वकालत नहीं की, मतलब बाबा साहब अहिंसा के ही पुजारी थे।
इसके साथ ही इस दिन पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी का भी जन्मदिवस मनाया जाता है। जिसे कायस्थ पाठशाला और चित्रगुप्त परिवार धूमधाम से मनाता हैं । और यहीं 2 अक्तूबर उन 200 दलित जातियों के लिए महत्वपूर्ण है जिन्हें सांसद रहतें महाशय जी नें जरायमपेशा एक्ट से मुक्ति दिलानें को संघर्ष किया था।
मेरा ऐसा मानना है कि गांधी जी और शास्त्री जी के विषय में बहुत कुछ लिखा पढ़ा जा चुका है। लेकिन महाशय मसूरियादीन के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं क्योंकि वे अनुसूचित जाति में जन्मे पासी जाति के थे , इसलिए कथित भारतीय इतिहासकारों ने उन्हें नज़र अंदाज़ किया । आज हम बताएंगे की स्वतंत्रा आंदोलन में महाशय जी का कितना बड़ा योगदान रहा है । हालाकि महापुरुषों का काम कभी ब्यर्थ नही जाता इसलिए यूपी कैडर में आईपीएस रहें राम प्रकाश सरोज, राज कुमार इतिहासकार, रामदयाल वर्मा जैसे कुछ सबार्ल्टन चिंतकों ,इतिहास लेखकों और साहित्यकारों ने ही उनके योगदान पर लिखा है ।
मेरा यह आरोप नही लगा रहा कि गाँधी व शास्त्री जी के बराबर महाशय जी को तवज्जों क्यों नही मिली ? लेकिन यह जरूर कहना चाहूंगा कि देश और समाज के प्रति उनके त्याग व निष्ठा का मूल्यांकन नही किया गया ।
महाशय जी का जन्म व शिक्षा-
2 अक्टूबर 1911 को इलाहाबाद जनपद के तेलियरगंज इलाक़े के जोधवल मोहल्ले में श्री विन्देश्वरी प्रसाद के घर जन्मे महाशय जी की प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय गवर्नमेंट नेशनल स्कूल में हुई। हालांकि उन्हें उच्य शिक्षा प्राप्त करने का अवसर नहीं प्राप्त हो सका तथापि भारत में अंग्रेजों द्वारा भारतीयों पर होने वाले अत्याचार, दमन शोषण के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने हेतु उनके कार्यों को देखकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने उन्हें स्नातक की उपाधि देकर सम्मानित किया था ।
गाँधी जी से पहला संपर्क –
महाशय जी बचपन से ही सामाजिक कार्य में रुचि रखते थे, देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने की भावना उनमें भरी थी । उस समय स्वतंत्रता आंदोलन की गति तीव्र थीं । भारतीय जनमानस पर महात्मा गांधी जी नाम छाया था । अचानक गांधी जी का इलाहाबाद भ्रमण हुआ और वें महाशय जी के गाँव जोधवल भी गयें। उसी समय महाशय जी का उनसे प्रथम साक्षात्कार हुआ और उसी क्षण से गांधीजी के प्रेरणा स्रोत से स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़े। तब महाशय की उम्र 22 वर्ष थीं इसके बाद वें गाँधी जी से मृत्यु तक जुड़े रहे तथा उनके द्वारा चलाए गए राष्ट्रीय आंदोलन निर्भीकता के साथ भाग लेते रहे। जिसके फलस्वरूप उन्हें कई बार कारावास की सजा भोगनी पड़ीं और जेलों में उन्हें यातनाएं दी गई थी, अंग्रेजो ने उनपर कोड़े बरसायें। अपने जीवन के 11 बहुमूल्य वर्ष उन्होंने जेल में बिताया था । कट्टर आर्य समाजी होने के नाते वें महाशय नाम से लोकप्रिय हो गए।
अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन में भूमिका –
1942 में गांधी जी के नेतृत्व में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन जोरों पर था उस आंदोलन में माताजी को गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें नैनी जेल भेज दिया गया जेल में उन्हें अचानक घर पर रह रहे उनकी पत्नी की गंभीर रूप से अस्वस्थ होने का पता चला अंग्रेजों ने महाशय जी को प्रलोभन दिया कि यदि वह स्वाधीनता संग्राम से अपने को अलग कर लें तो घर जाने वह पत्नी की चिकित्सा कराने हेतु रिहा कर दिया जाएगा लेकिन उन्हें जेल की कालकोठरी में पड़ेगा अंग्रेजों के साथ स्वास्थ्य पूर्ण समझौता करने से साफ इंकार कर दिया कुछ दिनों के बाद बाबूजी को पत्नी की मौत की ख़बर जेल से ही प्राप्त हुई। लेकिन उनके ह्रदय में भारत माँ को अंग्रेजो के चंगुल से मुक्त कराने की ऐसी दृढ़ इच्छा थीं कि पत्नी का वियोग उन्हें विचलित नही कर सका ।

समाज सुधार में योगदान –
महाशय जी का दूसरा पक्ष समाज में फैले धार्मिक अंधविश्वास, सामाजिक भेदभाव ,कुरूतियों को दूर करने तथा गरीब वर्गों को शिक्षा के जरिए उत्थान के लिए उनका सतत संघर्ष रहा है । इसके लिए वें साइकिल से गाँव गाँव इलाहाबाद जिले का भ्रमण किया करते । पूर्वराज्य मंत्री रामानंद भारतीय बतातें हैं उनके साथ ढोलक, हारमोनियम, ख़ंजड़ी लिए अखिल भारतीय पासी महासभा की टोली होती थीं। वें दलित बहुलता वालें गांवो में जाकर चौपाल लगाया करतें और स्थानीय भाषाओं में गीत गाकर समाज को जागरूक किया करतें थें “हमरे भईया के बिगाड़स यहीं दरूइया हो न …. रामानंद गुनुगुनाने लगें ।
गाँव गाँव मे शिक्षा की अलख-
महाशय जी की क्षेत्र भ्रमण में उस स्थान को चिन्हित करतें जहां विद्यालय बड़ी आवश्यकता थी । आजादी के पहले उनके द्वारा लगभग 14 विद्यालयों की स्थापना की जा चुकी थी । विद्यालय बनाना ही उनका मकशद नही बल्कि उन्हें सुचारू रूप में संचालित करने के लिए उन्होंने तरक़ीब लगाई थीं ” जिस गांव में विद्यालय की स्थापना करना होता था उस गांव के प्रत्येक घर में उन्होंने मिट्टी के एक-एक घड़े वितरित कर दिए जाते तथा महिलाओं से प्रतिदिन मुट्ठीभर आटा दान करने की प्रार्थना किया करतें थें । गांव की महिलाएं भोजन बनाते समय प्रतिदिन 1 मुठ्ठी आटा डाल देतीं थीं। महीने भर में एकत्रित आटे को बेच दिया जाता और शिक्षकों का वेतन दिया जाता था ,निसंदेह बाबू जी का यह प्रयोग अनूठा अनुकरणीय एवं प्रेरणादायक रहा । गाँव के गरीब, निर्धन, दलित खासतौर पर पासी समुदाय के छात्रों को शहर में रहकर पढ़ाई करने के लिए 6 छात्रावास खोलें उनके संचालन के लिए समितियां बनाई । जिसमें तीन दलित छात्रावास बलुवाघाट, आदि हिन्दू छात्रावास ,राजापुर तथा डीसी हॉस्टल भरद्वाज आश्रम के पास आज भी संचालित हैं। इन छात्रावासों में रहकर हजारों प्रतियोगी अनेक प्रदेश व केंद्र सरकार की नौकरियों में उच्य पदों पर आसीन हैँ।
राजनीतिक दायित्व –
महाशय जी 1946 से 52 तक डोमिनियन गवर्नमेंट में सदस्य रहें फिर सन 1950 से 52 तक अंतरिम लोकसभा के सदस्यों ने बनाये गए तथा संविधान सभा के भी सम्मानित सदस्य रहें । वें बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के संपर्क में हमेशा बनें रहे । 1952 में हुए लोकसभा के आम चुनाव में वें फूलपुर लोकसभा से चुनाव लड़कर सांसद बने और लगातार 1971 तक चायल,कौशाम्बी( तब इलाहाबाद) लोकसभा के सांसद बने रहे । इसी दौरान महाशय जी ने अंग्रेजों द्वारा लगाएं गए जरायम पेशा एक्ट जो लगभग 200 जातियों पर आज़ादी के बाद भी नही हट पाया था महाशय जी ने प्रधानमंत्री नेहरू जी पर दबाव डालकर इन पासी सहित सभी जातियों को क्रिमिनल ट्राइब एक्ट से मुक्त कराया।

महाशय जी ने अपना पहला लोकसभा चुनाव 1952 में पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ संयुक्त रूप से फूलपुर संसदीय क्षेत्र से लड़ा था और विजयी होकर लोकसभा में पहुंचे थे । इस चुनाव में महाशय जी को पंडित जवाहरलाल नेहरू से अधिक मत प्राप्त हुए थे । नेहरू जी उन्हें बहुत स्नेह करते थे एवं छोटे भाई जैसा मानते थें । इंदिरा जी उन्हें चाचा से कह कर संबोधित करतीं थीं । नेहरू जी के अलावा बाबा साहब अंबेडकर ,सरदार पटेल, पुरुषोत्तम दास टंडन ,डॉ राजेंद्र प्रसाद के साथ उन्हें लंबी अवधि तक कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था।
राज्यपाल का पद अस्वीकार –
लोकजनशक्ति पार्टी की महिला शाखा की राष्ट्रीय अध्यक्ष महाशय जी की पुत्री कमला कुमारी बताती हैं कि बाबूजी (महाशय जी) को राजपाल बनने के लिए दो और अवसर मिले थे,लेकिन उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के निवेदन को आग्रहपूर्वक अस्वीकार कर दिया था । उनका मानना था कि ” राज्यपाल के पद पर नियुक्त होकर मैं राजभवन तक सीमित हो जाऊंगा तो तथा उस जनता से दूर हो जाऊँगा, जिसके उत्थान एवं कल्याण के लिए जीवन समर्पित करने की मैंने प्रतिज्ञा कर रखी है”

सारांश

महाशय जी ने ग्रामीण जनता में व्याप्त सामाजिक कुरीतियों धार्मिक ,अंधविश्वासों ,नशाखोरी ,जात -पात छुआछूत आदि के विरुद्ध भी जिहाद छेड़ रखा था। इसके लिए उन्होंने अधिकांश उत्तरी भारत के प्रदेशों के ग्रामीण अंचलों का व्यापक भ्रमण करके इन कुरीतियों को दूर करने के लिए निरंतर प्रयास किए महाशय अखिल भारतीय पासी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की लंबी अवधि तक काम किए तथा पूरे भारत में पासियों को संगठित करने का भी काम किया । सम्पूर्ण भारत के पासी संगठनों महाशय जी में श्रद्धा रखता हैं और 2 अक्तूबर को गाँधी, शास्त्री जी के साथ उनकी जयंती मनाता हैं।
21 जुलाई 1978 को समाज की सेवा करते करते हैं उनका जैविक शरीर शांत हो गया। लेकिन उनके द्वारा किये सामाजिक कार्यो ने उन्हें आज भी जिंदा रखा हैं.
महाशय जी के जीवन से जुड़ी घटनाओं ने उन्हें सच्चे राष्ट्रभक्क्त की श्रेणी में खड़ा करता हैं । ऐसे महान राष्ट्रवादी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और मानवता के पुजारी को शत-शत नमन ।
सन्दर्भ ग्रन्थ :
1- आजादी के दीवाने पासी ,लेखक – राम प्रकाश सरोज, पूर्व आईपीएस यूपी कैडर ।
2- पासी समाज का स्वंत्रता संग्राम में योगदान -लेखक राजकुमार
3- स्वतंत्रता संग्राम में अछूतों का योगदान – लेखक डी.सी दिनकर
4- अखिल भारतीय पासी महासभा के नेता व पूर्व राज्य मंत्री रामानंद से मौखिक बातचीत

5-महाशय जी की पुत्री कमला कुमारी व बीना रानी से बातचीत

(लेखक : श्रीपासी सत्ता पत्रिका के संपादक है- संपर्क : 9838703861 )

पासी किशोरी के साथ गैंगरेप ,थाने में हंगामा, आरोपी फ़रार क्या कर रहीं हैं कौशाम्बी पुलिस ?

कौशाम्बी / सरायअकिल थानांतर्गत पासी समाज की 16 वर्षीय बेटी कब साथ चार युवकों ने गैंगरेप किया। बेटी जब घास काटने खेत मे गई थीं तो घात लगाकर बैठें दरिंदो ने उसे पकड़कर घसीटते हुए दूसरे खेत में ले गए और मुँह दबाकर जबरन बलात्कार किया और वीडियो भी बनाया .चीखपुकार सुनकर सैकड़ो ग्रामीण इकट्ठा हुए एक आरोपी पकड़ा गया लेकिन तीन अभी फरार हैं।

इस घटना के तुरंत बाद सैकड़ो लोग इकट्ठा होकर थाने पर हंगामा किया । पुलिस उल्टे लड़की के पिता को भी मारा पीटा तो गुस्साए गांव वालों ने पुलिस पर पथराव किया जिससे कई पुलिस कर्मी घायल हुए। एससपी ने आरोपियों पर रासुका के तहत कार्यवाही की बात कहीं हैं। लेकिन अभी तक आरोपी पकड़े नही गए।

राम औतार पासी को न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा : सुशील पासी

अमेठी / आज राष्ट्रीय भागीदारी मिशन के तत्वावधान में विशाल धरना प्रदर्शन दिनाँक16 -09-2019को तहसील तिलोई मोहन गंज में मुख्य संयोजक सुशील पासी जी के नेतृत्व में किया गया ।

जिसका मुख्य उद्देश्य ग्राम भिखारी पुर में पुलिस के द्वारा राम अवतार पासी की हत्या के संबंध में उपजिलाधिकारी को अवगत कराना एवम उपजिलाधिकारी द्वारा महामहीम राज्यपाल को ज्ञापन देना था ।

सुशील पासी जी ने विशाल जन सभा को सम्बोधित करते हुए कहाँ कि राम अवतार पासी की हत्या के दोषी पुलिसकर्मियों की तत्काल गिरफ्तारी हो तथा उसके परिवार को 50 लाख मुआवजा दिया जाए। ऐसा न होने पर हमारा संघर्ष जारी रहेगा उक्त घटना में कार्यवाही न होने पर आगे और बड़ी जनसभा व धरना देने की बात कही । इस अवसर पर बड़ी संख्या में राष्ट्रीय भागीदारी मिशन के कार्यकता उपस्थित रहें।

आखिर पुलिस अभिरक्षा में मजदूर राम अवतार पासी को किसने मारा ? साजिशन हत्या या गैर इरादतन हत्या  ●अजय प्रकाश सरोज 

अमेठी जनपद का शिवरतनगंज का थानेदार ज्ञान चंद्र शुक्ला व इंहौना चौकी प्रभारी धीरेंद्र वर्मा किसके कहने पर राम अवतार पासी को फ़र्जी चोरी के आरोप में पकड़कर 4 दिन थाने में पिटाई की ? बड़ा सवाल हैं ? जवाब में सामाजिक कार्यकर्ता व पासी एकता मिशन अमेठी के अध्यक्ष सूबेदार आरडी पासी बताते हैं कि रक्षाबंधन के आसपास ही राम अवतार पासी, भिखारीपुर गाँव के ही ठेकेदार द्वारिका प्रसाद तिवारी के घर अपनी मजदूरी की बकाया राशि मांगने गया था । मजदूरी न मिलने पर ठेकेदार से कहाँ सुनी हुई थीं,एक दूसरे को देख लेने तक की बात हुईं थीं। जिसे ठेकेदार ने अपना अपमान समझ लिया और मजदूर राम अवतार को शबक सिखाने के लिए पुलिस द्वारा उत्पीड़न की साज़िश रचने लगा ।

ज्ञापन सौंपते हुए पासी एकता मिशन अमेठी के लोग
जब इसकी भनक राम अवतार के पिता को पता चली तो उन्होंने राम अवतार को गाँव छोड़कर कानपुर शहर में कमाने जाने को दबाव बनाया और 21 अगस्त को शाम 4 बजें गाँव से कुछ दूरी तक छोड़ने भी गए। ताकि राम अवतार को कानपुर के लिए निकला जाए। लेकिन उसके घर से निकलने की सूचना पर शिवरतनगंज के थानेदार ने इन्हौना चौकी इंचार्ज के माध्यम से उस पर चोरी का फर्जी इल्जाम लगाकर रास्ते में ही पकड़वा लिया और घरवालों को बिना सूचना दिए चार दिन तक हिरासत में रखकर पिटाई की ,जिससे 25 अगस्त की सुबह उसकी मौत हो गई । मामला दलित मजदूर से जुड़ा हैं तो शासन -प्रशासन के लोग सरकार के दबाव में लीपापोती करने लगे हैं।
राष्ट्रीय भागीदारी मिशन के नेता व विधनसभा तिलोई कोआर्डिनेटर मो0 उमर का कहना हैं “यह साजिशन हत्या हैं लेकिन पुलिस प्रशासन ,थानेदार ज्ञानचन्द्र शुक्ला और चौकी प्रभारी पर गैर इरातदन हत्या का केश दर्ज किया हैं,और अब मृतक के पिता पर समझौतें का दबाव बना रहीं हैं। जिसके विरोध में हम 16 सिंतम्बर को धरना प्रदर्शन करेंगे “
अफ़सोस की बात यह हैं कि पुलिस कस्टडी में दलित मजदूर को फर्जी आरोप में चार दिन तक थाने में रखकर पीट पीट कर हत्या कर दीं जाती हैं, और कहा जाता हैं कि रखवालों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक भी नही दीं गईं , मानवाधिकार की धज्जियां उड़ाई जाती हैं। लेकिन जिला प्रशासन खामोशी से मामलें को दबाने में लगा हैं।
जांच में दोषी पाए गए पुलिसकर्मियों पर अभी तक कार्यवाही क्यो नही ?

जांच में शिवरतन गंज के थाना अध्यक्ष ज्ञानचन्द्र शुक्ल और इंहौना चौकी प्रभारी धीरेंद्र वर्मा को अवैध रूप से हिरासत में रखने और मानवाधिकार उल्लंघन का प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर निलंबित कर दिया गया है। एसपी ने बताया कि, शव का डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया है और इसकी वीडियोग्राफी भी की गई है। घटना के 20 दिन बाद भी दोषियों को गिफ्तारी नही हुई ? मजदूर परिवार को किसी भी प्रकार की कोई आर्थिक सहायता राशि नही दीं गईं हैं? और न ही कोई मुआवजा दिया गया ? जबकि यह गंभीर प्रकरण राष्ट्रीय मानवाधिकार समेत प्रदेश के उच्च अधिकारियों के संज्ञान में हैं । फिर भी शासन – प्रशासन का ढिलमिल रवैया असंवेदनशील को दर्शाता हैं ।

बीते कुछ माह लखनऊ में पुलिस द्वरा मारे गए विवेक तिवारी के परिवार को 1 करोड़ रुपये और उसकी पत्नी को ओएसडी की नौकरी योगी सरकार ने दिया । जबकि सरकार के नुमाइंदे राज्यमंत्री सुरेश पासी ने सरकार की ओर से हर संभव मदद का अश्वसन मृतक परिवार को दिया था लेकिन दलितों की रहनुमाई की राग अलापने वाली योगी सरकार के झूठ की कलई खुल गईं कि दलितों की मौत पर कुछ नही होगा ।

(अमेठी से ग्राउंड रिपोर्ट )

एक दर्दनाक हादसा : बीजेपी कौशाम्बी जिलाध्यक्ष रमेश पासी के रिश्तेदार की सड़क हादसे में मौत

प्रयागराज / पीजीआई लखनऊ से लौट रहें पासी दम्पति का कुंडा में एक्सीडेंट हो गया। कल रात 8 बजे हुई दुघर्टना में इलाहाबाद के नया कटरा निवासी बाल गोविन्द , 55 वर्ष की तत्काल मौत हो गईं ,जबकि पत्नी इंद्रावती 52 वर्ष गम्भीर रूप से घायल हो गईं है। जिसका इलाज सिविल लाइंस प्रयागराज में एक निजी अस्पताल में हो रहा हैं जहाँ उनकी हालत नाज़ुक बताई जा रहीं है।

मृतक बाल गोविंद का शव पोस्टमार्टम के बाद आज घर पहुँचा तो परिवार वालो का रो रोकर बुरा हाल है । इसके बाद रसूलाबाद घाट पर उनका परिवरिकजनो ने अन्तष्टि की। दुर्घटना के शिकार हुए दम्पति भाजपा कौशाम्बी के जिलाध्यक्ष रमेश पासी के सालें थें जो इलाज़ के लिए पीजीआई लखनऊ गए थे। वापसी में कुंडा बाईपास पर गाड़ी ओवरटेक होते ही दूरी गाड़ी से भिड़ गई।